बड़ी दुर्घटना के इंतज़ार में शिक्षा विभाग दर्जनों शाला भवन जर्जर हालत में कही एक कक्ष में कई कक्षाएं तो कही आंगनबाड़ी भवन में लग रहा स्कूल।
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रहली ।ब्लॉक में अनेक स्कूल भवन एवं आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर अवस्था में बरसों से तब्दील है कहीं जर्जर भवन में ही स्कूल लग रहे हैं तो कहीं एक ही कक्षा में कई कक्षाएं लग रही हैं, लेकिन प्रशासन का ध्यान कभी नहीं जाता। इस संबंध में शिक्षा विभाग से जानकारी लेने पर ज्ञात हुआ कि जर्जर भवनों की रिपोर्ट कई बार प्रशासन को भेजी जा चुकी है लेकिन फंड नहीं आने से जर्जर भवन की हालत में कोई सुधार नहीं किया जा रहा है। ग्राम पंचायत बगासपुरा की माध्यमिक शाला भवन क्षतिग्रस्त है, पिछले 4 साल से माध्यमिक शाला प्राइमरी शाला में लग रही है ।प्राइमरी शाला बगासपुरा में सिर्फ तीन कमरे हैं बच्चों को बरामदे में टीन सेट लगाकर अध्यापन कार्य किया जा रहा है। प्राथमिक शाला बरखेड़ा सिकंदर यहां पर दर्ज संख्या 100 के आसपास है सिर्फ एक कक्ष में शाला संचालित हो रही है, पुराना भवन जर्जर हो चुका हैं ।प्राथमिक शाला सोनपुर का भवन कई वर्षों से क्षतिग्रस्त है, जिसका माध्यमिक स्कूल भवन में वर्षों से संचालित हो रही है। माध्यमिक शाला नवलपुर का भी भवन क्षतिग्रस्त वर्षों से है साथ ही खैजरा गढ़ाकोटा प्राथमिक भवन पूर्णतः क्षतिग्रस्त हो चुका है पर यहां की शाला आंगनवाड़ी में लग रही है।
प्राथमिक शाला कड़ता यात्री प्रतीक्षालय भवन , प्राथमिक शाला भवन, ग्राम पंचायत बरखेड़ा शिक्षा गारंटी शाला भवन, रानीपुरा शासकीय विद्यालय, ऐसे अनेक भवन जर्जर हालत में है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों के जर्जर भवन को देखकर तो एक बार अभिभावकों का दिल रो पड़ता होगा कि, कैसे इस स्कूल में अपने बच्चों का एडमिशन कराए। इसे दुर्भाग्य कहे या मजबूरी अभिभावकों को अपने बच्चों को दिल पर पत्थर रखकर स्कूल भेजना पड़ रहा है । यह कुछ स्कूल तो सिर्फ बन गई है ऐसे अनेक स्कूल हैं जहां के भवन जर्जर हो रहे हैं लेकिन जिले के अधिकारी फंड का अभाव बताकर हमेशा कन्नी काट जाते हैं।
जिले की अधिकारियों की नोनिहालो के प्रति इस अनदेखी को देखकर तो ऐसा ही लगता है यह किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में है जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाएगी शायद उसके बाद ही जर्जर होते भावनाओं की दशा बदल सकेगी।
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